चैत्र शुक्ल तीज के अवसर पर श्रीराम वाटिका में दो दिवसीय गणगौर के मेले का आयोजन किया गया। जिसमें बड़ी संख्या में नवविवाहताओं ,युवतियों व महिलाओं भाग लिया। मेले में नवविवाहिताओं ने अपनी-अपनी गणगौर की सवारी निकाल कर उसका पूजन किया। इस मौके पर गणगौर की पारम्परिक गीत गाये गये। माना जाता है कि इस दिन गणगौर को उसके ससुराल भेजा जाता है। नगर पालिका की ओर से विधिवत पूजा-अर्चना के बाद गाजे-बाजे के साथ गणगौर व ईसर की भव्य सवारी निकाली गई। जो नगर पालिका से प्रारंभ होकर कस्बें के मुख्य-मुख्य मार्गों से होते हुये मेला स्थल श्रीराम वाटिका पहुंची। जगह-जगह गणगौर की सवारी का पुष्प वर्षा कर स्वागत किया गया। गणगौर की सवारी में बड़ी संख्या में महिला व पुरूष शामिल हुये। मेले में विभिन्न प्रकार के सामान व खाने-पीने की वस्तुओं की दुकान सजी। मेले को लेकर मातृशक्तियों में खासा उत्साह नजर आया। राजस्थान की संस्कृति में रचे बसे गणगौर पर्व को लेकर हमेशा से उत्साह का माहौल रहा है। वर्तमान आधुनिकता के चलते आज भी इस पर्व को लेकर महिलाओं, नवविवाहताओं व युवतियो के उत्साह में कोई कमी नही आई है।

