अलवर लाई गईं तेलंगाना की पुंगनूर नस्ल की गायें बनीं आकर्षण का केंद्र, PM निवास में भी इन गायों का संवर्धन
अलवर: देश भर में गोपालन को बढ़ावा देने की बातें सुनाई पड़ती हैं, लेकिन शहरीकरण के चलते जगह उपलब्ध नहीं होने से लोगों के लिए गायों को पालना आसान नहीं रह गया. इसी समस्या का हल है पुंगनूर नस्ल की गाय. अपनी छोटी कद-काठी और मात्र 27 इंच ऊंचाई होने से इस नस्ल की गायों का शहरों में पालन आसान है.
सनातन संस्कृति में गोपालन को बढ़ावा देने के लिए अलवर के वेंकटेश बालाजी दिव्य धाम मंदिर में पुंगनूर नस्ल की गाय की एक जोड़ी (बछड़ा व बछड़ी) लाई गई हैं, जो दर्शनार्थियों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी अपने निवास पर दुर्लभ प्रजाति पुंगनूर नस्ल की गायों का पालन कर इसके संवर्धन का संदेश दे चुके हैं.
अलवर के वेंकटेश बालाजी दिव्य धाम मंदिर के महंत सुदर्शनाचार्य ने बताया कि पुंगनूर नस्ल की गायों का एक जोड़ा अलवर लाया गया है. यह गायों का जोड़ा तेलगांना प्रदेश के पुंगनूर क्षेत्र से लाया गया है. पुंगनूर नस्ल गाय की विशेषता है कि इसकी ज्यादा से ज्यादा ऊंचाई 27 इंच होती है. छोटी कद-काठी होने के कारण इसका पालन छोटी सी जगह में संभव है. उन्होंने बताया कि मंदिर में लाई गई गायों की ऊंचाई अभी 18 इंच है. इनका नामकरण राधा कृष्ण के नाम पर किया गया है. उन्होंने बताया कि लोगों को गोपालन का संदेश देने के लिए पुंगनूर नस्ल की गायों को अलवर लाया गया है.
तेलगांना में कर रहे संरक्षण : महंत सुदर्शनाचार्य ने बताया कि तेलंगाना प्रदेश के राजमहेन्द्री जिले के पुंगनूर क्षेत्र के करीब 20 किलोमीटर में कई लोगों की ओर से पुंगनूर नस्ल की गायों का संरक्षण किया जा रहा है. वहीं से इस प्रजाति की गायों के जोड़े को अलवर लाया गया है. पुंगनूर नस्ल की गायों की कीमत 2 से 10 लाख रुपए तक रहती है. दुर्लभ प्रजाति की यह गाय सभी तरह का चारा खाती है. कद काठी व कम ऊंचाई की होने के कारण यह कम भोजन करती है और एक समय में दो से ढाई लीटर दूध देती हैं.
गायों को देखने उमड़े श्रद्धालु : महंत सुदर्शनाचार्य ने बताया कि इस दुर्लभ नस्ल की एक जोड़ी गाय तेलंगाना से 48 घंटे की लंबी यात्रा तय करने के बाद अलवर पहुंचीं. इन गायों को देखने के लिए स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी. लोगों ने पहली बार इस अनोखी गाय को देखा. इन गायों की जोड़ी को विशेष
शहरों में पुंगनूर नस्ल की गाय पालना आसान : महंत सुदर्शनाचार्य ने बताया कि पुंगनूर गाय को घर व कमरों में पाल सकते हैं. तीन दिन पहले मंदिर में लाई गई इस नस्ल की गायों की जोड़ी टाइल्स वाले कमरे में भी आराम से रहती हैं. मंदिर के सेवादारों से इस कदर घुल मिल गई कि उनके साथ खेलती हैं व दौड़ लगाती हैं. उन्होंने बताया कि इस नस्ल की गायों को शहरों में पालना आसान है. लोग अपने घरों में इसे आसानी से पाल कर पुंगनूर नस्ल गायों के संवर्धन में योगदान दे सकते हैं.
साधारण व अन्य नस्लों की गायें कद-काठी में बड़ी व ज्यादा ऊंचाई की होने के कारण उन्हें पालने के लिए ज्यादा जगह की जरूरत होती है. शहरों में इतनी जगह उपलब्ध नहीं हो पाती, जिसके लोग गोपालन की चाह रखने के बाद भी गाय नहीं पाल सकते.

