नोहर, 10 मार्च। अंग्रेजो के समय बने कानूनों को लेकर स्वदेशी कानून सोसायटी द्वारा शुरू कि गई मुहिम के तहत बुधवार को यहां ग्रेन मर्चेन्ट ट्रेडर्स हॉल में लोक संसद का आयोजन किया गया। इस मौके पर जनमत के तहत आमजन से प्रपत्र के माध्यम से सुझाव भी लिये गये। इस मौके पर सोसायटी के अध्यक्ष रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी दलीप जाखड़ ने बताया कि स्वदेशी कानून सोसायटी उपनिवेशी कानून व्यवस्था को बदलकर जनहित में कानून बनाने के लिए मंच है। उन्होंने इस मौके पर कहा कि ईस्ट इंडिया कम्पनी द्वारा थौपे गये कानून आज भी हमारे देश में चल रहे है। जबकि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता के लिये बनाये गये कानून जनता से पूछ कर बनने चाहिये। उन्होंने कहा कि शासन और कानून कि सारी व्यवस्थाए आज भी उपनिवेशी तर्ज पर जारी है। दलीप जाखड़ के अनुसार विधि आयोग, सेंटर फॉर सिविल सोसायटी एवं स्वदेशी कानून सोसायटी ने एक हजार से अधिक ऐसे कानूनों कि छंटनी की है जो लोकतंत्र, मानवाधिकार और अंतरराष्ट्रीय कानून के विरोधी है। परदेशी कानून व्यवस्था को हटाकर स्वदेशी कानून लागू करने कि मुहिम को लेकर स्वदेशी कानून सोसायटी द्वारा देश कि विभिन्न हिस्सों में कार्यक्रम चलाये जा रहे है। आमजन का इस मुहिम में भारी उत्साह देखा जा रहा है। उन्होंने हाल ही में लाये गये तीनों कृषि कानूनों को भी स्वदेशी कानून कि तर्ज पर किसानों के लिये घातक बताया। उन्होंने जानबूझकर मतदान नही करने वालों को सरकारी योजनाओं का लाभ नही देने की वकालत की। इस मौके पर सोसायटी के सचिव संदीप चाहर, गे्रन मर्चेन्ट एशोसियेशन के अध्यक्ष कृष्ण कासनिया, सोसायटी के संरक्षक जसवंत गोदारा, व्यापार संघ के अध्यक्ष अनिल कड़वासरा, एडवोकेट जसवंत आर्य, एडवोकेट कन्हीराम बैनीवाल, लक्ष्मीनारायण सहारण, सुल्तान सहारण,सुखदेव सिंवर सहित व्यापारी व किसान उपस्थित थे। इस मौके पर स्वदेशी कानून के संबंध में आमजन से सुझाव भी लिये गये। कार्यक्रम का संचालन कृष्ण सहारण ने किया।

