भादरा (सत्यनारायण भाकर) छानी बडी मे राष्ट्रीय पक्षी मोर को एक पार्क बनाकर ग्रामीण सुरक्षित कर रहे हैं मोरो की विलुप्त होती प्रजाति के लिए जिले भर मे एक मात्र मोर सरक्षण पार्क है परन्तु अभी तक ना तो वन विभाग ओर ना ही राज्य सरकार ने इसे मोर संरक्षित क्षेत्र घोषित किया है हालांकि ऐसा नही कि ग्रामीणों ने इसे मोर संरक्षित क्षेत्र घोषित कराने का प्रयास नही किया ।परन्तु जनप्रतिनिधियों की ऊदासीनता के चलते करीब चार बिघा जमीन मे बने इस मोर सरक्षण पार्क को कभी सरकारी योजनाओं का फायदा नहीं मिला पाया ।वर्ष 2005 मे वन विभाग की करीब चार बिघा जमीन मेमोर सरक्षण उधान की स्थापना करने वाले मूकेश कूमार शर्मा (अध्यापक)ने बताया की वन विभाग ने इस मोर सरक्षण उधान के लिए स्वीकृति तो कई वर्षो पर्व ही दे दी थी ।अगर विभाग ग्रामीणों द्वारा स्थापित इस मोर संरक्षित उधान मे सहयोग करते तो आज इसे एक पक्षी उधान के रूप मे विकसित किया जा सकता था ।संस्था के संरक्षक भागीरथ सेठ ने बताया कि उन्होंने सर्वप्रथम वन विभाग हनूमानगढ के जिला अधिकारी से उधान मे रेस्क्यू सेंटर की मांग की थी ।वहा से केवल अशवासन मिला ।रेस्क्यू सेटर नही है यहा तक कि आज भी जब इस मोर संरक्षित उधान के लिए ग्रामीण वन विभाग से पोधारोपण के लिए पोधे मागे जाते है तो वन विभाग पोधे तक नही देता ।मूकेश शर्मा बताते की वन विभाग से इस चार बिघा जमीन की तार बन्दी के लिए भी सहयोग मांग गया ।परंतु विभाग से साफ इनकार कर दिया ।तब ग्रामीणों ने गाव से 4लाख रूपये इकट्ठे कर मोर सरक्षण उधान की तार बन्दी करवाई ।उससे लगती सिचाई विभाग की 12बिघा जमीन मे रहने वाले जगली कूते,गीदड;व बल्लियों बार बार पार्क मे घूसकर मोरो पर आक्रमण कर देते है है जिससे वे घायल हो जाते है ग्रामीणों ने बार बार सिचाई विभाग की इस जमीन पर तार बन्दी करने के लिए राज्यं सरकार वन विभाग ओर सिचाई विभाग से अपील की परन्तु इस जमीन की तार बन्दी नही की गई।

