सरपंचों के बाद अब पंचायत समिति प्रधानों को भी प्रशासक बनाने की मांग तेज़

सरपंचों के बाद अब पंचायत समिति प्रधानों को भी प्रशासक बनाने की मांग तेज़
नोहर 1 नवंबर सरपंचों के बाद अब पंचायत समिति प्रधानों को भी कार्यकाल खत्म होने के बाद उनको भी प्रशासक लगाने की मांग जोर पकड़ने लगी है। पंचायत राज से जुड़ी विभिन्न समस्याओं को लेकर प्रदेश भर के प्रधान जयपुर में इकट्ठा हुए। जयपुर सचिवालय में पंचायतीराज विभाग के कांफ्रेंस हॉल में  प्रधानों के साथ पंचायतीराज विभाग के सचिव डॉ. जोगाराम व अन्य अधिकारियों की बैठक हुई। बैठक के उपरांत प्रधान संघ के प्रदेश अध्यक्ष दिनेश सुडा व पंचायत समिति प्रधान सोहन ढिल के नेतृत्व में विभिन्न पंचायत समितियो के प्रधानों ने मांग पत्र भी सोपा। प्रधान सोहन ढिल ने बताया कि पूर्व में समस्याओं को लेकर मुख्यमंत्री को ज्ञापन दिया गया था इसके बाद मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा द्वारा मांगों के संबंध में विभिन्न विभागों के अधिकारियों की कमेटी गठित की गई कमेटी द्वारा अब मांगों पर बिंदुवार चर्चा की गई है।बैठक में प्रधान संघ द्वारा पिछले दिनों में उठाई गई करीब 50 समस्याओं के समाधान को लेकर बिंदूवार चर्चा हुई। बैठक में बताया गया कि अगले महीने प्रदेश की अधिकतर पंचायत समितियों का कार्यकाल पूरा हो रहा है। इसलिए जिस तरह सरपंचों को प्रशासक के रूप में पंचायतों के संचालन का कार्य दिया गया है। उसी तरह सरकार चुनाव की तारीख घोषणा होने तक प्रधानों को भी बतौर प्रशासक पंचायत समितियों में नियुक्त करें। ताकि पंचायतीराज सहित अन्य विभागों की योजनाओं और विकास कार्यों को लगातार गति मिल सके।बैठक में पंचायतीराज विभाग, ग्रामीण विकास विभाग, सार्वजनिक निर्माण विभाग, खान एवं पेट्रोलियम विभाग तथा राजस्व विभाग के अलावा  नोहर प्रधान सोहन सिंह ढील, टिब्बी प्रधान निक्कूराम मेघवाल, जालसू प्रधान हरदेव यादव, खाजूवाला प्रधान धर्मपाल बिरड़ा, परबतसर प्रधान ओमप्रकाश व विजयनगर प्रधान गुरमीत आदि मौजूद थे। 
निजी आय से खर्च की सीमा बढने की उम्मीद
 बैठक में प्रधान संघ की करीब 50 मांगों पर बिंदुवार चर्चा हुई। 
जिसमें प्रमुख रूप से प्रधान को पंचायत समिति की निजी आय में से 10 लाख रूपए तक एक साल में खर्च करने की अनुमति मिलने की उम्मीद जगी है। उन्होंने बताया कि अभी तक प्रधान एक साल में निजी आय में से सिर्फ 50 हजार रूपए तक ही खर्च कर सकता है। लेकिन जो चर्चा हुई है। इसमें 10 लाख रूपए तक यह राशि बढाए जाने की उम्मीद जगी है। बैठक में प्रधानों ने बताया कि अधीनस्थ कर्मचारियों के स्थानांतरण जिला परिषद के द्वारा करने से पहले प्रधान से सहमति ली जाए। नगर पालिका के तरह ग्रामीण क्षेत्रों में भी पंचायत समिति को 90 भूमि रूपांतरण करने के अधिकार दिए जाएं। मनरेगा योजना में प्रधान का पूर्ण रूप से प्रशासनिक वृत्तीय नियंत्रण स्थापित करते हुए भागीदारी सुनिश्चित की जाए। पंचायत राज के अधीनस्थ पांचों विभागों में विभिन्न कार्य योजनाओं में प्रधान की भूमिका को  मजबूत किया जाए। ग्राम पंचायत में सरकारी विद्यालय, आंगनबाड़ी सहकारी संस्थाओं व सरकारी भवनों की मरम्मत व नवीन भवन में विस्तार के कार्य की अनुमति दी जाए। पंचायत समितियां में सरकारी गाड़ी उपलब्ध करवाई जाए। नोहर पंचायत समिति प्रधान सोहन ढिल ने बताया कि बैठक में ना केवल प्रधानों बल्कि पंचायतीराज के पंच से लेकर जिला प्रमुख तक के जनप्रतिनिधियों के लिए रखी गई मांगों को लेकर अधिकारियों ने आश्वस्त किया है कि कुछ मांगों का जल्द ही समाधान होकर आदेश जारी होंगे। कई ऐसी समस्याएं है। जिनके समाधान के लिए आगामी बजट में प्रावधान रखा जाएगा। बैठक में अधिकारियों ने बताया कि प्रधानों को प्रशासक लगाए जाने की मांग मुख्यमंत्री व मंत्री तक पहुंचाएंगे।