गोगामेड़ी में राज्यपाल ने कहा – नई शिक्षा नीति भारत की आत्मा को पुनर्जीवित करने का प्रयास
नोहर, 27 जून। भारत आदिकाल से ही शिक्षा में श्रेष्ठ रहा है। प्राचीन भारत में शिक्षा का एक समृद्ध इतिहास रहा है, प्राचीन भारत में शिक्षा का मुख्य आधार गुरुकुल प्रणाली थी, जहां गुरु (शिक्षक) अपने शिष्यों को अपने आश्रम में रखते थे और उन्हें विभिन्न विषयों की शिक्षा देते थे। इस प्रणाली में विद्यार्थियों को न केवल ज्ञान दिया जाता था, बल्कि नैतिक, सामाजिक और आध्यात्मिक मूल्यों का भी विकास किया जाता था। आधुनिक भारत में भी शिक्षा को बहुत महत्व दिया जाता है। यह बात राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े ने शुक्रवार को गोगामेड़ी के गोरक्षटीला में आयोजित राजस्थान शिक्षक संघ (राष्ट्रीय) के प्रांतीय महासमिति अधिवेशन मेें कही। इस अवसर पर राज्यपाल ने कहा कि जो शिक्षा नीति दशको पूर्व बदली जानी चाहिये थी। वो नही बदली गई। वर्तमान में नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति लागू कि गई है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को अध्ययन के साथ-साथ कौशल ज्ञान करवाया जाना भी आवश्यक है। युवा पीढ़ी को हमारे शास्त्रों का भी ज्ञान होना चाहिये। उन्होंने कहा कि शिक्षा ऐसी हो जिससे बौद्धिक व शारीरिक क्षमता भी बढ़े। उन्होंने कहा कि देश के शिक्षा के संस्कारों को तहस-नहस करने के लिये अनेक बार आक्रांताओं ने हमले किये। मगर वे इसमें सफल नही हो पाये। राज्यपाल ने कहा कि शिक्षक राष्ट्र के निर्माण की रीढ़ है। राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े के अनुसार नई शिक्षा नीति केवल पाठ्यक्रम में बदलाव नही, बल्कि यह भारत की आत्मा को पुनर्जीवित करने का प्रयास है।
ये रहे उपस्थित
अधिवेशन की अध्यक्षता गोगामेड़ी के महंत रूपनाथ की। अधिवेशन में आरएसएस जोधपुर प्रांत के प्रचारक विजयानंद, शैक्षिक महासंघ के राष्ट्रीय संगठन मंत्री महेन्द्र कपूर, शिक्षक संघ राष्ट्रीय के प्रदेशाध्यक्ष रमेश पुष्करणा, कार्यक्रम संयोजक पवन जाखड़ आदि उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन महेन्द्र लखारा ने किया। दो दिवसीय इस अधिवेशन में प्रदेश भर के 2500 से अधिक शिक्षकों ने भाग लिया।
अनेक विषयों पर हुई चर्चा
अधिवेशन में शिक्षकों की विभिन्न समस्याओं पर चर्चा कि गई व संगठन द्वारा निकट भविष्य में करवाये जाने वाले कार्यों का रोडमेप भी तैयार किया गया। अधिवेशन में शिक्षकों की विभिन्न समस्याओं से शिक्षा मंत्री को अवगत कराया गया। अधिवेशन के दौरान प्रदेश कार्यकारिणी का निर्वाचन भी हुआ। जिसमें रमेश चंद्र पुष्करणा को दोबारा प्रदेशाध्यक्ष चुना गया। इसके अलावा विभिन्न पदों पर भी निर्वाचन हुआ।
गोरक्षटीला व गोगामेड़ी में किये दर्शन
राज्यपाल व शिक्षा मंत्री ने गोरक्षटीला व गोगामेड़ी में पूजा-अर्चना कर प्रदेश की खुशहाली व समृद्धि की कामना की।
ये रहे उपस्थित
अधिवेशन की अध्यक्षता गोगामेड़ी के महंत रूपनाथ की। अधिवेशन में आरएसएस जोधपुर प्रांत के प्रचारक विजयानंद, शैक्षिक महासंघ के राष्ट्रीय संगठन मंत्री महेन्द्र कपूर, शिक्षक संघ राष्ट्रीय के प्रदेशाध्यक्ष रमेश पुष्करणा, कार्यक्रम संयोजक पवन जाखड़ आदि उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन महेन्द्र लखारा ने किया। दो दिवसीय इस अधिवेशन में प्रदेश भर के 2500 से अधिक शिक्षकों ने भाग लिया।
अनेक विषयों पर हुई चर्चा
अधिवेशन में शिक्षकों की विभिन्न समस्याओं पर चर्चा कि गई व संगठन द्वारा निकट भविष्य में करवाये जाने वाले कार्यों का रोडमेप भी तैयार किया गया। अधिवेशन में शिक्षकों की विभिन्न समस्याओं से शिक्षा मंत्री को अवगत कराया गया। अधिवेशन के दौरान प्रदेश कार्यकारिणी का निर्वाचन भी हुआ। जिसमें रमेश चंद्र पुष्करणा को दोबारा प्रदेशाध्यक्ष चुना गया। इसके अलावा विभिन्न पदों पर भी निर्वाचन हुआ।
गोरक्षटीला व गोगामेड़ी में किये दर्शन
राज्यपाल व शिक्षा मंत्री ने गोरक्षटीला व गोगामेड़ी में पूजा-अर्चना कर प्रदेश की खुशहाली व समृद्धि की कामना की।

