जानकारी के बाद सरकार ने दिल्ली, हरियाणा, उत्तरप्रदेश और गुजरात से सटे बॉर्डर पर चौकसी बढ़ा दी है। कभी भी बॉर्डर सील हो सकता है। इंटेलिजेंस ब्यूरो ने सरकार को इनपुट दिया कि पायलट समर्थक विधायक दिल्ली अथवा पड़ौसी राज्यों में जाकर एक बार फिर बाड़ेबंदी कर सकते हैं। विधायकों के साथ स्थानीय निकाय व पंचायत प्रतिनिधियों के भी जाने की सूचना है । इंटेलिजेंस सूचना है कि इस बार गहलोत कैंप के कुछ विधायक भी पायलट के संपर्क में है । मौका मिलते ही वे ही पाला बदल सकते हैं ।
एक बार फिर बाड़ेबंदी
बुधवार सुबह से ही गहलोत और पायलट खेमे सक्रिय हो गए। गहलोत के विश्वस्त संसदीय कार्यमंत्री शांति धारीवाल, कृषि मंत्री लालचंद कटारिया,राज्यमंत्री सुभाष गर्ग, विधानसभा में सरकारी मुख्य सचेतक महेश जोशी और उप मुख्य सचेतक महेंद्र चौधरी ने अपने कैंप के विधायकों को फोन कर उनका मन टटोला। कुछ से व्यक्तिगत मुलाकात भी की। साथ ही पायलट समर्थक विधायकों से भी बात की। उधर पायलट के विश्वस्त विधायक रमेश मीणा,मुरारी मीणा व वेदप्रकाश सोलंकी ने अपने खेमे के विधायकों को एकजुट करने की तैयारी शुरू की है। ये विधायक निर्दलीयों के साथ ही बसपा से कांग्रेस में शामिल होने वाले विधायकों से भी संपर्क साध रहे हैं।
पायलट खेमे ने कांग्रेस के संगठन महासचिव के.सी.वेणुगोपाल,प्रदेश प्रभारी अजय माकन से बात कर कह कि जब पंजाब के विवाद को लेकर आलाकमान इतनी सक्रियता देखा सकता है तो राजस्थान के मामले में दिलचस्पी क्यों नहीं ले रहा। पंजाब के नेताओं से आलाकमान की कमेटी ने बात भी कर ली। लेकिन राजस्थान को लेकर बनाई गई समिति की एक भी अधिकारिक बैठक नहीं हुई

