जनसेवा ने लौटाईं सांसें: दिया नया जीवनहैप्पी हाइपॉक्सिया से लड़ी लंबी लड़ाई/ घर आकर लोगों को कर रहीं जागरूक

जनसेवा ने लौटाईं सांसें: दिया नया जीवन
हैप्पी हाइपॉक्सिया से लड़ी लंबी लड़ाई/ घर आकर लोगों को कर रहीं जागरूक 
कोरोना से हमारा परिचय ज़्यादा नया नहीं है तो पुराना भी नहीं है। मैं पिछले साल श्रीगंगानगर में सहायक निदेशक सूचना एवं जनसंपर्क के पद पर स्थानान्तरित होकर आयी थी , जब मुझे हल्का बुखार हुआ और मुझे उस समय की गाइडलाइंस के अनुसार क्वेरेंटीन किया गया । मैं और मेरा बेटा नेगेटिव ही रहे और गाइडलाइंस का पालन करते हुए अपने घर लौटे। तब हमें यह पता नहीं था कि इस साल उसी महीने में हमें दोबारा इसका सामना करना पड़ेगा। मैं स्वयं ज़िले में कोरोना जागरूकता अभियान चला रही हूं व इसका प्रचार प्रसार कर रही थी ऐसे में मुझे कब कोरोना हो गया मुझे पता ही नहीं चला ।  10 अप्रैल को मुझे भी हल्का बुखार खाँसी और बदन दर्द शुरू हुआ मुझे उसी समय एहसास हो गया कि मुझे कुछ अलग सा लग रहा है मैंने टेस्ट करवाया और 11 तारीख़ को मेरी रिपोर्ट पॉज़िटिव आयी। मेरे बेटे और मम्मी की रिपोर्ट नेगेटिव थी । मैंने तुरंत ही डॉक्टर से पूछ के ख़ुद को जिला अस्पताल में एडमिट करवाया इसके बाद वहाँ मेरा छह दिन इलाज हुआ और मैं सकुशल घर आ गई।  दो ही दिन बाद मुझे वापस बहुत बुरे लक्षण उभरने लगे जब अचानक से मेरी ऑक्सीजन कम होने लगी तब मुझे वापस एहसास हुआ कि कुछ ग़लत हो रहा है। मैंने तुरंत जनसेवा अस्पताल में फ़ोन लगाया और उन्हें एंबुलेंस भेजने के लिए कहा साथ ही मैंने जिला कलेक्टर श्री ज़ाकिर हुसैन, एसडीएम श्री उम्मेद सिंह रत्नु और एडीएम प्रशासन श्री भवानी सिंह को भी अपनी स्थिति से अवगत कराया । उन्होंने तुरंत मदद का भरोसा जताया। जनसेवा अस्पताल ने तुरंत ही एमरजेंसी समझते हुए मुझे एम्बुलेंस भेजकर अस्पताल में एडमिट करवाया।  जब मैं अस्पताल में एडमिट हुई तो मेरी कंडीशन बहुत ख़राब थी और ऑक्सीजन 78 पर चल रही थी। सी टी स्कैन कराते ही मुझे आई सी यू में भर्ती किया गया जहाँ मेरा इलाज शुरू हुआ । रात में मेरी तबियत काफ़ी बिगड़ गई और ऑक्सीजन 30 पर चली गई , ऐसी स्थिति में पेशेंट को रिकवर करना लगभग नामुमकिन होता है परंतु डॉक्टर्स के अथक प्रयासों और पैरामेडिकल स्टाफ़ की सेवा से मुझे बचाने में सफलता मिली। अगले 5-6 दिन बेहद अहम थे। ऑक्सीजन का स्तर घटता -बढ़ता रहता था और मुझे बाई - पैप सपोर्ट पर रखा गया था। दिन रात इंजेक्शन लगते थे । जनसेवा अस्पताल के स्टाफ़ ने फिजियोथेरेपी के साथ बेहद हिम्मत और हौसला दिया। उनकी बातों से मुझे ताक़त मिलती थी साथ ही परिवार वालों ने फ़ोन पर बातचीत कर मुझे पॉज़िटिव रखने में मदद की। मैं 14 साल पहले अपने पति को एक सड़क दुर्घटना में हो चुकी हूँ व मेरे दो बेटे हैं। मेरे दोनों बेटों व बहू के भी कोरोना पॉज़िटिव होने की ख़बर मुझे अस्पताल में मिली पर मैंने अपना हिम्मत और हौसला नहीं खोया और लगातार ईश्वर से प्रार्थना की कि हर कोरोना मरीज़ को स्वस्थ कर दे और किसी के परिवार में कोई हादसा नहीं हो। यहाँ डॉक्टर्स दिन में कई बार विज़िट करते थे तथा मानसिक संतुलन को बेहतर बनाने के लिए उपाय भी बताते थे और हौसला अफ़ज़ाई करते थे जिससे मुझे रिकवर होने में बेहद मदद मिली। जनसेवा अस्पताल में जो खाना मिलता था वो भी अच्छी क्वालिटी का था जिसकी वजह से मेरी तबियत संभलने लगी। जब भी मुझे मौक़ा मिलता था मैं मंत्र पढ़ती और ख़ुद को पॉज़िटिव बनाए रखने की हर संभव कोशिश करती थी। जिला प्रशासन ने भी इस दौरान मेरी भरपूर मदद की और वे हर समय फ़ोन पर मेरा कुशलक्षेम जानते रहते थे। श्रीगंगानगर ज़िला परिषद सी ई ओ स्वयं मुझे देखने अस्पताल आए व मेरी हौसलाअफजाई की।
14 दिन बाद आई सी यू से बाहर निकलते हुए बाहर की दुनिया को देखकर मैं फूट फूट कर रोयी और ऐसा लगा कि मुझे नया जीवन मिला है। घर आने के बाद मुझे अभी होम क्वेरेंटीन रखा गया है तथा मैं डॉक्टर की निगरानी में हूं। मुझे डायट का पूरा ध्यान रखने के लिए कहा गया है तथा दवाइयां भी समय से लेनी होती है जिससे मुझे जल्दी रिकवर होने में मदद मिलेगी। जनसेवा अस्पताल के डॉक्टर्स द्वारा सही परामर्श दिए जाने व समय पर सही इलाज मिलने से मेरी जान बच सकी। अब मैं उन मरीज़ों को जागरूक करने का काम कर रही हूँ जो कोरोना पॉज़िटिव हैं ताकि वे समय से अपना इलाज कराएं और उनकी जान बच सके। जब मुझे पता चला कि मुझे हैप्पी हाइपॉक्सिया जैसी इतनी जानलेवा बीमारी हुई थी व मेरी रिपोर्ट्स बेहद ख़राब थीं l मेरा सीटी स्कोर 21, सी आर पी 83 था उसके बावजूद भी मैंने कोरोना को हराया था और सकुशल घर आ सकी तो एकबारगी मुझे विश्वास ही नहीं हुआ।  आमजन से मेरी यही गुज़ारिश है कि कोरोना एक घातक बीमारी है और इससे बचने का हर संभव प्रयास करना चाहिए । यदि यह बीमारी हो जाए तो ऐसे में घर पर अपना इलाज करने से बचें और जल्द से जल्द डॉक्टर को दिखाएं।