शहीद को नम:आंखों से दी विदाई,उमड़ा जन सैलाब।

नमन:शहीद को नम:आंखों से दी विदाई,उमड़ा जन सैलाब।  

 अंतिम यात्रा में गूंजा,जब तक चांद-सूरज रहेगा शहीद जालिम सिंह का नाम रहेगा,

 शहीद के पार्थिव शरीर के दर्शन के इंतजार में सिसक-सिसक कर कटी लोगों की रात

- घरों में नहीं जले चूल्हे,अंतिम यात्रा का लोगों ने जगह-जगह पुष्प वर्षा कर किया सम्मान। 

नोहर 12 मार्च। कश्मीर की राजधानी श्रीनगर में गुरूवार को शहीद हुए फेफाना गांव के जालिम सिंह गोदारा का शनिवार को राजकीय सम्मान के साथ गांव के श्मशान घाट में गमगीन माहौल में संस्कार किया गया। शहीद जालिम सिंह की 2 वर्षीय बेटी इसीता ने शव को मुखाग्नि दी तो हर आंख नम होत उठी । जैसे ही जालिम के शहीद होने की सूचना मिली तो फेफाना के आस-पास क्षेत्र में शौक लहर दौड़ गई। लोगों ने शहीद के पार्थिव शरीर के दर्शन करने के लिए दो दिन सिसक-सिसक कर बिताए। शनिवार को अल सुबह से ही नोहर से आने वाले मार्ग पर पुष्प लेकर पार्थिव शरीर के स्वागत के लिए जन सैलाब उमड़ गया। गांव पहुंचे पार्थिव शरीर को उमड़े जन सैलाब ने पुष्प वर्षा करते हुए ‘भारत माता की जय,वंदे मातरम व जब तक सूरज चांद रहेगा शहीद जालिम सिंह का नाम रहेगा सहित जयकारों के साथ घर तक पहुंचाया। घर पहुंचते ही कोहराम मच गया। शहीद की मां,पत्नी व बहिन को रो-रो कर बुरा हाल हो गया। घर से सम्मान के साथ शहीद की अंतिम यात्रा शुरू हुई और गांव की गलियों से होते हुए श्मशान घाट पहुंची। गलियों में जगह-जगह ग्रामीणों द्वारा अंतिम यात्रा का पुष्प वर्षा करते हुए सम्मान के साथ श्रद्वाजंलि अर्पित की। विधायक अमित चाचाण,प्रधान सोहन ढिल्ल,भादरा विधायक बलवान पूनियां,एसडीएम श्वेता कोचर,,पूर्व विधायक अभिषेक मटोरिया,भाजपा के प्रदेश मंत्री काशीराम गोदारा,पूर्व प्रधान अमर सिंह पूनियां,मंगेज चौधरी सहित प्रशासनिक अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों ने शहीद को पुष्प अर्पित कर श्रद्वाजंलि दी। शहीद का जन्म गांव के किसान ओमप्रकाश गोदारा के घर हुआ। मां का नाम मनी देवी हैं। शहीद एक भाई ओर एक बहिन से छोटा था। शहीद जालिम सिंह की शादी तीन साल पूर्व हुई। जिनके एक बेटी हैं ढाई साल की। शहीद जालिम सिंह ने गांव के  नेहरू चिल्ड्रन उ.मा.स्कूल में कक्षा 10 वीं व  रा.उ.मा. स्कूल में कक्षा 11 वीं की पढ़ाई की। 12 वीं शार्दूल स्पॉटर्स स्कूल बीकानेर से की।  शहीद की खेल में अधिक रूची थी। जो 3 बार नेशनल कुस्ती का चैम्पियन रहा। शहीद के पिता ओमप्रकाश गोदारा ने बताया कि बचपन से ही जालिम का सेना में जाने का सपना था। ओर सन् 2011 में सीआरपीएफ में भर्ती हो गए। विदित रहे कि गुरुवार शाम पांच बजे लाल चौक श्रीनगर में जालिम सिंह की हदय गति रूकने से निधन हो गया। शहीद जालिम सिंह का पार्थिव देह जब गांव फेफाना पहुंचा तो युवाओं ने उनके सम्मान में बाइक पर तिरंगा यात्रा भी निकाली। सीआरएफ के जवानों ने शहीद को गार्ड ऑफ ऑनर दिया